वर्ष 2023 का बीना स्मृति सम्मान का आयोजन करणप्रयाग ब्लॉक सभागार में आयोजित किया गया पर्यावरण के क्षेत्र में कार्य करने वाले कार्यकर्ताओं तथा साहित्यकारों पत्रकारों सहित नौ लोगों को यह सम्मान वर्ष दिया गया
चमोली बीना स्मृति सम्मान हर वर्ष जनपद चमोली से दिया जाता है एक पर्यावरण संरक्षण के लिए दिया जाता है बीना बरौली गांव की वह वीरबाला थी जो वनों में आग बुझाते हुए शहीद हो गयी थी 12 मई 1999 को करणप्रयाग ब्लॉक जनपद चमोली के गांव वरतोली के जंगल में आग बुझाती बुझाते अमर हो गई उनके पिताजी राजेंद्र सिंह बिष्ट उस समय उस गांव के ग्राम प्रधान थे बीना जब जंगल में अपनी सहेलियों के साथ आग बुझा रही थी उसका आधा शरीर जल चुका था लोगों ने उसको करणप्रयाग हॉस्पिटल में भर्ती कराया डॉ राजीव शर्मा सर्जन ने बहुत प्रयास किया वह नहीं बच पायी और वह शहीद हो गयी । इस घटना पर करणप्रयाग में कार्यरत समाजसेवी जितेंद्र कुमार लोक जागृति विकास संस्थान के सचिव की नजर रखे हुए थे उन्होंने इस मार्मिक घटना पर एक रचना कर डाली तेरु ऋतु बसंत बॉडीके आदू मंनखी बोड़ी नि आनंदा ।इस तरह की रचना के साथ जितेंद्र कुमार ने वरतोली में यात्राये का आयोजन किया तत्कालीन शिक्षा मंत्री उत्तराखंड नरेंद्र सिंह भंडारी ने भी इस कार्यक्रम में भागीदारी की। और निरंतर बीना के बलिदान की कहानी जगह जगह पर व्याख्यान किया जाने लगा। वर्ष 2003 में लोक जागृति विकास संस्थान करणप्रयाग के निदेशक जितेंद्र कुमार और जनदेश उरगम के सचिव लक्ष्मण सिंह नेगी के द्वारा बीना स्मृति फाउंडेशन की स्थापना की गई और पर्यावरण शिक्षा पर काम करने वाली एक कार्यकत्री को यह पहला सम्मान दिया गया इस कार्यक्रम की अध्यक्षता बद्रीनाथ विधानसभा के तत्कालीन विधायक पूर्व मंत्री केदार सिंह फोनिया के द्वारा किया गया और तब से लेकर आज तक यह कार्य का निरंतर जारी रहा 50 से अधिक सामाजिक कार्यकर्ताओं लेखकों पत्रकारों को यह सम्मान मिल चुका है जो अपने-अपने क्षेत्रों में अलग अंदाज में काम करते रहें इसमें जमीनी स्तर के पर्यावरण कार्यकर्ता भी शामिल रहे हैं वर्ष 2023 को करणप्रयाग ब्लॉक सभागार में यह सम्मान समारोह आयोजित किया गया जिसमें नो लोगों को यह सम्मान दिया गया जिसमें पर्यावरण क्षेत्र में काम करने वाले शेप संस्था के निदेशक शिवनारायण किमोठी जो जनपद चमोली के दूरस्थ क्षेत्रों में पर्यावरण शिक्षा बालिका शिक्षा महिला संगठनों की क्षमता विकास के लिए दो दशकों से निरंतर काम कर रहे हैं 40 से अधिक महिला संगठनों के साथ जल जंगल और जमीन के संरक्षण के लिए कार्यरत हैं। दशोली विकासखंड के अंतर्गत कुडाऊं गांव की पूर्व महिला मंडल अध्यक्ष पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य सीमा असवाल को सम्मान के लिए चुना गया वह एक लंबे समय से पर्यावरण संरक्षण के साथ महिला सशक्तिकरण वन अग्नि सुरक्षा जैविक खेती के कार्यक्रमों को बढ़ावा दे रही है। उर्गम घाटी में काम करने वाले बख्तावर सिंह रावत एक लंबे समय से विभिन्न संस्थाओं के साथ पर्यावरण शिक्षा पर्यावरण संरक्षण वृक्षारोपण बालिका शिक्षा के कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने के साथ-साथ जन सरोकारों के कार्यों में निरंतर काम करते रहे जोशीमठ विकासखंड में राजीव गांधी अभिनव आवासीय विद्यालय सरकार द्वारा बंद किया जा रहा था उसको बचाने के लिए एक सौ से ज्यादा दिनों तक जन संघर्षों में निरंतर कार्यरत रहे और स्कूल बंद होने से बचाने में सहयोग किया उषा आर्य प्रधानाध्यापिका राजकीय प्राथमिक विद्यालय सोनाली उनकी शिक्षा और पर्यावरण संरक्षण के कार्य के लिए पम्मी नवल लोक संस्कृति के संरक्षण संवर्धन के क्षेत्र में डॉक्टर के एस कठैत आंखों के सर्जन एक लंबे समय तक लोगों को चिकित्सा के क्षेत्र में सहयोग प्रदान कर रहे हैं मनोज सती अध्यापक ग्राम लगासू वन संरक्षण समर्थन के लिए शीशपाल सिंह नेगी आदर्श राजकीय इंटर कॉलेज गोपेश्वर लोक संस्कृति संरक्षण के क्षेत्र में ओमप्रकाश बहुगुणा पत्रकारिता के क्षेत्र में जखोली ब्लॉक रुद्रप्रयाग इन लोगों को मुख्य अतिथि करणप्रयाग राजकीय अतिरिक्त स्वास्थ्य केंद्र की मुख्य महिला रोग विशेषज्ञ डॉक्टर उमा भट्ट , नंदा राज जात समिति के महामंत्री भुवन नौटियाल , भारतीय जनता पार्टी के जिला अध्यक्ष ईश्वरी प्रसाद मैखुरी, समाजसेवी लेखक चिंतक उधव देवली के हाथों से यह सम्मान दिया गया । इस अवसर पर राजकीय इंटर कॉलेज करणप्रयाग के छात्र छात्राओं के द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति शानदार तरीके से की गई इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राचार्य भी उपस्थित रहे इस अवसर पर बीना स्मृति फाउंडेशन के सचिव जितेंद्र कुमार ने सभी आगंतुकों का स्वागत एवं अभिनंदन किया। इसके बाद फाउंडेशन के अध्यक्ष लक्ष्मण सिंह नेगी के द्वारा वन अग्नि सुरक्षा जलवायु परिवर्तन गंगा की स्वच्छता के बारे में विस्तार से बात रखीयदि हिमालय को हिमालय की तरह नहीं रखा गया और हिमालय के बारे में सार्थक चिंतन यदि समाज ने नहीं किया तो वह समय दूर नहीं जब हिमालय रेगिस्तान हो जाएगा सामरिक दृष्टि से हिमालय भारत के लिए बहुत आवश्यक है सीमाओं पर हिमालय एक पर परहरी की तरह काम करता है जलवायु के संतुलन में हिमालय का अहम योगदान है यदि हिमालय गर्म होता है तो पूरे हिंदुस्तान पर इसका कुप्रभाव पड़ता है लगातार हिमालय क्षेत्रों में बाढ़ भूकंप भूस्खलन ग्लेशियर टूटने की घटनाएं बढ़ी है और उससे हजारों लोगों को भारी नुकसान हुआ है हमारा जिस तरह से पर्यावरण पर छेड़छाड़ किया जा रहा है उससे लगातार तापमान में वृद्धि हो रही है जल स्रोत सूख रहे हैं चौड़ी पत्ती का जंगल समाप्त हो रहा है इन घटनाओं को रोकने के लिए सहभागिता आधार पर काम करने की आवश्यकता है और एक आंदोलन का रूप उसे देना पड़ेगा पूरी दुनिया में तापमान वृद्धि को लेकर लोग लगातार चिंतित हैं आंदोलन कर रहे हैं धरने पर बैठे हैं इस तरह से हमें चेतना नौजवानों को अपने कार्यक्रमों में शामिल करना होगा और गंगा की स्वच्छता तभी संभव है जब हर व्यक्ति इस काम को करेगा। समाज में जनचेतना की निरंतर आवश्यकता है बीना के बलिदान को निरर्थक नहीं दिया जाना चाहिए।
