शाकम्भरी देवी सिद्धपीठ सहारनपुर का पुराणों मे उल्लेख

देहरादून। उत्तर भारत में उत्तर प्रदेश राज्य के जिला सहारनपुर में चार राज्यों उत्तर प्रदेश, हरियाणा, हिमाचल और उत्तराखंड की सीमा के समीप हिमालय की शिवालिक पहाड़ियों में माता जगत जननी जगदम्बा पराम्बिका माँ भगवती विश्वेश्वरी शाकम्भरी देवी का दरबार है, जिनको शाकंभरी के अतिरिक्त शाकम्भर,शाकुम्भर, शाकुम्भरी,शाकुंभरा आदि क्षेत्रीय भाषी नामों से भी पुकारा जाता है। युगों से भगवती का यह प्राचीनतम पीठ देशभर के प्रमुख देवी तीर्थ स्थलों में सुशोभित है जहां प्रतिवर्ष करोड़ों भक्त माता के दर्शन करने आते हैं और माँ भी उनकी झोलियां खुशियों से भर देती है। आदिगुरु शंकराचार्य जी के अतिरिक्त ईसा पूर्व राजनीति के जनक चाणक्य और चंद्रगुप्त ने भी यहां माँ की आराधना की थी ऐसा माना जाता है। चंद्रगुप्त मौर्य अपने प्रवास के दौरान यहां की पहाड़ियों में सेना का गठन करते थे। महाभारत मे उल्लेखित है कि युधिष्ठिर ने यहां माता की पंचोपचार पूजा की थी। शाकंभरी पीठ के संबंध मे कुछ साक्ष्य इस प्रकार है
शाकम्भरी देवी सिद्धपीठ सहारनपुर की प्राचीनता पुराणों के अनुसार :- महाभारत वनपर्व के ‘तीर्थयात्रापर्व’ के अंतर्गत अध्याय 84 में पुलस्त्य द्वारा विभिन्न तीर्थों के बारे में बताया गया है, जिसका उल्लेख निम्न प्रकार है- सौगंधिक वन( सिंधु वन शिवालिक के वन) , सरस्वती उद्गम स्थल(वर्तमान आदि बद्री स्थल यमुनानगर हरियाणा मे), शतकुम्भा( साढौरा के पास शिवालिक पर्वत की गोद मे शतकुम्भा शिव गौरी मंदिर), पंचयज्ञा(अज्ञात), शाकम्भरी देवी(शाकम्भरी क्षेत्र सहारनपुर), स्वर्ण तीर्थ(सहंसरा तीर्थ शाकम्भरी क्षेत्र) , उसके बाद हिमालय पर्वत को नमस्कार करने की बात की गई है और हरिद्वार की यात्रा व अन्य तीर्थों की महिमा दर्शन करने का वर्णन है उसके बाद गंगा- यमुना के बीच के क्षेत्र प्रयाग तीर्थ की महिमा है ये सभी तीर्थ आज भी मौजूद है केवल कुछ ही अज्ञात है.
स्कंदपुराण मे शाकम्भरी देवी सहारनपुर :- स्कंदपुराण मे शाकम्भरी देवी के बारे मे उल्लेख किया गया है कि यहाँ पर देवी ने सौ वर्षों वाले अकाल मे भरण पोषण कराया था और शाकम्भरी कहलाई और यहाँ पर शाकेश्वर महादेव प्रत्यक्ष सिद्धिदायक है जैसे शाकेश्वर महादेव प्रत्यक्ष सिद्धिदायकं पुरात्रेव महादेवी मुनिस्तपसी चाश्रिताम, विग्रहे शतवार्षिके शाकै स्वांग समुद्भ्वे, भरयामास परमा तत शाकम्भरी मता, प्रत्यक्ष सिद्धिदा देवी दर्शनात पापनाशिनी
स्कंदपुराण के अनुसार शाकम्भरी देवी के क्षेत्र मे शाकेश्वर महादेव प्रत्यक्ष सिद्धि देने वाले है ये शाकेश्वर महादेव केवल शाकम्भरी देवी सहारनपुर धाम मे ही है और पुराण के अनुसार यहीं पर शाकम्भरी देवी ने सौ वर्ष के अकाल मे भरणपोषण कराया था जिससे उनका शाकंभरी नाम प्रसिद्ध हुआ।
देवी भागवत् के अनुसार:- देवी भागवत् महापुराण के अनुसार सभी ऋषि मुनि हिमालय पर्वत पर गये और देवी के शरणापन्न होकर स्तुति करते हुए कहने लगे, महेशानी घोर संकट उपस्थित हैं. अत: स्पष्ट है ऋषि मुनियों ने हिमालय पर्वत पर देवी की स्तुति की थी वो सभी भूख प्यास से असमर्थ होने के कारण स्तुति करने मे असमर्थ हो रहे थे और जिसे आजकल शिवालिक पर्वत कहा जाता है वो हिमालय पर्वत का ही अभिन्न भाग है और वहीं माँ का मंदिर है क्योंकि ऋषि मुनि भूख प्यास से व्याकुल थे इसलिए वो हिमालय पर्वत की प्रथम श्रृंखला मे ही माँ भगवती का ध्यान करने लगे थे अत: हिमालय पर्वत पर ही माँ भगवती शाकम्भरी देवी का दरबार है दो दरबार जो राजस्थान मे है वो अरावली पर्वत पर है जबकि माँ का प्रादुर्भाव हिमालय पर्वत पर हुआ था , इसी प्रकार दुर्गमासुर को मारने के पश्चात जब देवता देवी की स्तुति कर रहे थे तो उन्हें पंचकोसी मे निवास करने वाली कह रहे थे और माँ भगवती शाकम्भरी देवी के दरबार को आज भी पंचकोसी सिद्धपीठ कहा जाता है माँ भगवती शाकम्भरी देवी चालीसा मे भी वर्णन है :- पांचकोस की खोल तुम्हारी, तेरी लीला अति विस्तारी
मारकंडे पुराण और शिव पुराण मे शाकम्भरी देवी की स्तुति हिमालय पर्वत की प्रथम शिखा पर बताई गयी है