राज्यपाल ने किया उत्तराखण्ड राज्य विश्वविद्यालय खेल प्रतियोगिता का शुभारम्भ

देहरादून/पंतनगर 24 फरवरी। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने गोविन्द बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, पंतनगर में 04 दिवसीय उत्तराखण्ड राज्य विश्वविद्यालय खेल प्रतियोगिता का शुभारम्भ किया। इस अवसर पर राज्यपाल ने 800 मीटर पुरुष, महिला वर्ग रेस के विजेताओं को मेडल व प्रशस्ति पत्र प्रदान किए। 800 मीटर रेस पुरुष वर्ग में एस.एस.जे. अल्मोड़ा के अंकित नाथ प्रथम, श्री देव सुमन उत्तराखण्ड विश्वविद्यालय टिहरी गढ़वाल के आसिफ द्वितीय, एस.एस.जे. अल्मोड़ा के ललित सिंह तृतीय स्थान पर रहे, जबकि महिला वर्ग 800 मी0 रेस में कुमाऊँ विश्वविद्यालय नैनीताल की नीतू प्रथम, उत्तराखण्ड संस्कृत विश्वविद्यालय हरिद्वार की चांदनी द्वितीय व एस.एस.जे. अल्मोड़ा की शीतल भट्ट तृतीय स्थान पर रही। खिलाड़ियों को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि खेल केवल पदक जीतने का माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का सशक्त साधन हैं। मैदान में जो अनुशासन, समर्पण और टीम भावना विकसित होती है, वही आगे चलकर राष्ट्र प्रथम की चेतना को सुदृढ़ करती है। जब कोई खिलाड़ी मैदान में उतरता है, तो वह केवल स्वयं का नहीं, बल्कि अपने राज्य और अपने राष्ट्र का प्रतिनिधित्व करता है। विश्वविद्यालयी जीवन केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं होना चाहिए। शिक्षा और खेल- दोनों का संतुलित विकास ही संपूर्ण व्यक्तित्व निर्माण का आधार है। जो विद्यार्थी पढ़ाई में उत्कृष्ट है और खेल में सक्रिय है, वही आत्मविश्वासी, संतुलित और नेतृत्व क्षमता से युक्त नागरिक बनता है।
राज्यपाल ने कहा कि “फिट युवा, सशक्त भारत” का संकल्प तभी साकार होगा जब हमारे विश्वविद्यालय खेलों को प्राथमिकता देंगे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में फिट इंडिया मूवमेंट और खेलो इंडिया जैसे अभियानों ने देश में जनभागीदारी से खेल संस्कृति को नई दिशा दी है। उन्होंने कहा कि जो युवा खेल के मैदान में पसीना बहाता है, वह जीवन में कभी गलत दिशा की ओर नहीं जाता। आज समाज के समक्ष एक बड़ी चुनौती नशे की प्रवृत्ति है। युवाओं को सकारात्मक दिशा देने का सबसे प्रभावी माध्यम खेल है। खेल ऊर्जा देता है, आत्मविश्वास देता है और जीवन को उद्देश्यपूर्ण बनाता है। राज्यपाल ने कहा कि राज्य में खेल मैदानों, स्पोर्ट्स अकादमियों और प्रशिक्षण सुविधाओं को सुदृढ़ करने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर पर ऐसे आयोजन खिलाड़ियों को मंच प्रदान करते हैं, जहाँ उनकी प्रतिभा निखरती है और उन्हें आगे बढ़ने का अवसर मिलता है। राज्यपाल ने कहा कि विश्वविद्यालय स्तर से ही राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मंच की तैयारी प्रारंभ होती है। उन्होंने खिलाड़ियों से आह्वान करते हुए कहा कि आप केवल इस प्रतियोगिता तक सीमित न रहें, बल्कि ओलंपिक जैसे वैश्विक मंचों को अपना लक्ष्य बनाएँ। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड की धरती से भी ऐसे खिलाड़ी निकलें जो विश्व पटल पर भारत का तिरंगा ऊँचा करें। जब तिरंगा विश्व मंच पर लहराता है, तो वह केवल एक खिलाड़ी की जीत नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारतवासियों का गौरव होता है। वह क्षण पूरे राष्ट्र की सामूहिक चेतना और गर्व का क्षण बन जाता है। जीत और हार दोनों जीवन का हिस्सा हैं। सच्ची विजय पदक में नहीं, बल्कि आपके प्रयास में है। खेल हमें सिखाते हैं कि सफलता में विनम्र और असफलता में धैर्यवान कैसे रहें। यही गुण जीवन में नेतृत्व और उत्कृष्टता का आधार बनते हैं। इस अवसर पर गोविन्द बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मनमोहन सिंह चौहान ने मुख्य अतिथि माननीय राज्यपाल का स्वागत करते हुए कार्यक्रम में उपस्थित अन्य विश्वविद्यालयों के कुलपतियों, अतिथियों का स्वागत एवं अभिनंदन किया और सभी खिलाड़ियों से खेल भावना तथा अनुशासन से खेलने का आहवान किया। उन्होंने कहा कि इस अंतर राज्य विश्वविद्यालय खेल प्रतियोगिता में 10 विश्वविद्यालयों के लगभग 722 खिलाड़ी प्रतिभाग कर रहे हैं। इस अवसर पर कुलपति कुमाऊँ विश्वविद्यालय प्रो डी. एस. रावत, कुलपति एस.एस.जे. अल्मोड़ा विश्वविद्यालय डॉ. सतपाल सिंह बिष्ट, कुलसचिव दीपा विनय, जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया, पुलिस अधीक्षक जितेन्द्र चौधरी, विश्वविद्यालय डेम बी एस चलाल, सीएमओ डॉ. केके अग्रवाल, अपर जिलाधिकारी कौस्तुभ मिश्रा सहित विश्वविद्यालय के डीन, डायरेक्टर, कोच, निर्णायक, खिलाड़ी मौजूद थे।

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