रंगयात्रा के उत्तरायणी कौतिक परिसर पहुंचने पर छह दिवसीय मेले का शुभारंभ
खटीमा। दो साल तक कोरोना के चलते उत्तरायणी कौतिक स्थगित रहने के बाद इस बार हुए आयोजन में लोगों का खासा उत्साह देखते ही बन रहा है।कुमाऊं सांस्कृतिक उत्थान मंच की ओर से तराई बीज विकास निगम के मैदान से निकाली गई रंगयात्रा को उप नेता प्रतिपक्ष एवं विधायक भुवन कापड़ी, एसडीएम रविंद्र सिंह बिष्ट, समिति अध्यक्ष कैप्टन ठाकुर सिंह खाती, सचिव भुवन भट्ट और मेला प्रभारी केडी भट्ट ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। रंगयात्रा सितारगंज रोड ब्लॉक कार्यालय परिसर, कॉलेज रोड, कुर्मांचल कॉलोनी, शारदा टॉकीज, पीलीभीत रोड से मुख्य चौक पहुंची। इसके बाद यहां से टनकपुर रोड मैदा मिल से होते हुए वापस उत्तरायणी कौतिक परिसर पहुंची।रंगयात्रा में सबसे आगे गोलज्यू की झांकी, इसके बाद क्षेत्र के विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राओं, थारू सांस्कृतिक कला मंच, महिलाओं की कलश यात्रा और छोलिया नृतकों की टीमे नाचती गाती चल रही थीं। विभिन्न सांस्कृतिक झांकियां लोगों के आकर्षण का केंद्र रहीं। रंगयात्रा के मुख्य चौक पर पहुंचते ही महिलाओं ने झोड़ा चाचरी गीत एवं हिलजात्रा, विद्यालयों के बच्चों ने शानदार प्रस्तुति दी।रंगयात्रा के उत्तरायणी कौतिक परिसर पहुंचने पर छह दिवसीय मेले का शुभारंभ एसडीएम रविंद्र सिंह बिष्ट, समिति अध्यक्ष कैप्टन ठाकुर सिंह खाती एवं समिति पदाधिकारियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। समिति अध्यक्ष खाती ने कहा कि मेले हमारी संस्कृति के धरोहर हैं। हमें अपनी संस्कृति को बचाए रखने के लिए इस प्रकार के आयोजन करते रहने होंगे।उत्तरायणी कौतिक की शुरूआत शगुन आखर से हुई। कुमाऊंनी गायिका रेनू उपाध्याय ने गणेश वंदना प्रस्तुति की। इसके बाद जय मलयनाथ सांस्कृतिक समिति, इनोवेशन पब्लिक स्कूल नानकमत्ता, मां जयंती कला केंद्र सतगढ़ (पिथौरागढ़) की ओर से हिलजात्रा, श्री शिरोमणि महाराणा प्रताप थारू सांस्कृतिक, पूर्णागिरि सांस्कृतिक सेवा समिति के कलाकारों ने अपनी शानदार प्रस्तुति दी। किशोर कान्छा एवं अंजना सिंह, अमित गोस्वामी ने लोक गीत प्रस्तुत कर लोगों को झूमने पर मजबूर कर दिया। इसके अलावा स्थानीय कलाकारों ने भी रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत किए। संचालन भुवन भट्ट एवं सावित्री चंद ने किया।बीएस मेहता, मोहनी पोखरिया, सावित्री कन्याल, लीला चंद, हरीश जोशी, मनोज कन्याल, किशन सिंह किन्ना, सुधीर बर्मा, राजेंद्र बिष्ट, कुन्दन सिंह मेहरा, जोहार सिंह बसेड़ा, पुष्पा धपोला, अंजू भट्ट, अंजू देवी, विमला बिष्ट, धाना भंडारी, कल्पना चन्द, कंचन चन्द, इंद्रा चंद, घनश्याम सनवाल, नवीन कापड़ी, लीला चंद, जगदीश पांडे, त्रिलोक गैड़ा, जगत मार्कडेय, केएन भट्ट, गोपाल दत्त पाठक, मुन्नी ओझा आदि मौजूद थे।
